शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

Karitk Stuti | Sharan mai aa Pade Swami | शरण में आ पड़े स्वामी

 शरण में आ पड़े स्वामी,

लगा दे पार हे कार्तिक।

तुम्हारी मातु है गिरिजा,

पिता हैं शंभू हे स्वामी।


जगत की ऊंच श्रेणी में,

बनाया धाम हे कार्तिक।

जिसकी छाया में रह करके,

सुखी हैं लोग हे स्वामी।


चरण से धार द्रोणाग्री,

वही है बेग से स्वामी।

जिसके जलपान करने से, 

होते हैं पार हे स्वामी।


चरण छू कर सभी बालक,

नवाते शीश हे स्वामी।

करो कल्याण हम सबका,

सहारा आपका भगवन।


सदा भक्तन के रक्षक हो,

सभी के मन में रहते हो।

तुम्हारी छात्र छाया में 

सभी सानंद हैं स्वामी।


उठो अब खोल नेत्रन को,

विनय भक्तों की सुन लीजिए,

पुन: अवतार ले करके,

सभी को पार कर दीजिए।


हमारे गृह मंदिर पर

कृपा दृष्टि करो भगवन।

सुखी संपन्न हो करके,

सभी दीर्घायु हो भगवन।


विनय विद्या से पुरित हों,

यही वर मांगते स्वामी।

हृदय में ज्ञान करूना का

करो संचार हे स्वामी।


भंवर में खा रही चक्कर

प्रभो मेरे घर की नैया

कृपा करके इसे भगवन

किनारे से लगा देना।


शरण में आ पड़े स्वामी

लगा दे पार हे कार्तिक।।

शनिवार, 6 मार्च 2021

Rudrashtakam

रुद्राष्टकम्


 नमामीशमीशाण निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद: स्वरुपम् ।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्‌ ॥


निराकामोंकारमूलं तुरीयं गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं ।

करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम्‌ ॥


तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारू गंगाल्लसद्भाल बालेन्दु कंठे भुजंगा ॥


चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालम् ।

मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥


प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।

त्रयःशूल निर्मूलनं शूल पाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥


कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनान्ददाता पुरारी ।

चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥


न यावद् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम ।

न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं प्रसीद प्रभो सर्व भूताधि वासं ॥


न जानामि योगं जपं नैव पूजा न तोऽहम्‌ सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।

जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥


रुद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हरितोषये

ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शंभो प्रसीदति ॥


॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

Kartikeya Stuti

कार्तिकेय बहु फलदायक स्‍तुति 


ॐ अभी‌‍ष्‍ट सिद्धि मे देहि

शरणागत वत्‍सले

भक्त्या निवेदितम् तुम्भ्यम्

कार्तिकेय नमस्‍तुते ॥१॥


श्री गंगा गर्भ सम्‍भूतो

सर्व देव नमस्‍कृतः

तारकासुर संहारी

चन्‍द्रशेखर नन्‍दनः ॥२॥


कार्तिकेय महाभागः

सप्‍त कलपान्‍त जीविनः

आयुरारोग्यम् सिध्यर्थ​

सुब्रह्मण्‍यं नमोस्‍तुते ॥३॥


वरामयो साक्षाद्‍

द्विभुजः शिखिवाहनः

किरीट कुण्‍डली देवो

दिव्य भरण भूषितः ॥४॥


सप्तर्षि दारजः स्कन्दः

सेनधिप महाबलः

रुद्र अग्निज षडवक्त्रः

गंगा गर्भ नमस्तुते ॥५॥


मयूर वाहनः स्कन्दः

गौरी सुत षडाननः

कार्तिकेय महाबाहु

दयां कुरु दयानिधे ॥६॥


कार्तिकेय महाबाहो

गौरी हृदय नन्‍दनः

कुरुमे दीर्घमायुर्माम्

त्‍वामहम् शरणं गतः ॥७॥


श्री स्कन्दः शंकरः पुत्रः

सत्यवादी जितेन्‍द्रियः

रम्यं सु मुख दिव्यं

सर्वसौख्यं करं शुभं ॥८॥


दुख दुर्भाग्य नाशाय​

देव देव जगद् गुरो

भक्‍तानामभयं कर्ताः

गिरिजाया प्रियं सुतम् ॥९॥


कार्तिकेय नमस्‍तुभ्यम्

भक्तानाम् मार्ति नाशनम्

सर्व व्याधि प्रशपनमं

त्वामहम् शरणागतम् ॥१०॥


सर्वदा सर्व कार्येषु

निर्विघ्न साध्येन्मम्

शान्ति करोतु सततं

गौरी पुत्र नमोस्तुते ॥११॥


मयूरो रोमभिः मन्द्रै

मयूर प्रिय वाहनः

प्रियत्तां देव सेनानिम्

सम्पादयतु हृद्गतम् ॥१२॥


कार्तिकेय सुर श्रेष्‍ट​

मयूर प्रिय वाहनः

कल्याणं कुरु मे देव

वरदो गौरी नन्‍दनः ॥१३॥


उमा कोभल हस्ताब्ज​

सम्भावित ललाटकम्

हिरण्‍य कुन्डलं वन्दे

त्राताभव भवार्णवान् ॥१४॥


नीलकन्‍ठ महाभागः

सुब्रह्म्ण्‍य सुवाहनः

सेनानिस्‍तारको हन्ता

सेनान्‍येते नमो नमः ॥१५॥


सुब्रह्म्ण्‍यं महाभागः

सुरासुर नमस्‍कृतः

देव सेनापते स्वामिन्

मयूर वर वाहनः ॥१६॥


‍॥ क्षमा प्रार्थना ॥

अज्ञान विस्‍मृत्यै भ्रान्त्या

यन्‍नूनमधिकं कृतं

क्षम सत्वं क्षम सत्वं

कार्तिकेय क्षमस्‍वमे ॥