शरण में आ पड़े स्वामी,
लगा दे पार हे कार्तिक।
तुम्हारी मातु है गिरिजा,
पिता हैं शंभू हे स्वामी।
जगत की ऊंच श्रेणी में,
बनाया धाम हे कार्तिक।
जिसकी छाया में रह करके,
सुखी हैं लोग हे स्वामी।
चरण से धार द्रोणाग्री,
वही है बेग से स्वामी।
जिसके जलपान करने से,
होते हैं पार हे स्वामी।
चरण छू कर सभी बालक,
नवाते शीश हे स्वामी।
करो कल्याण हम सबका,
सहारा आपका भगवन।
सदा भक्तन के रक्षक हो,
सभी के मन में रहते हो।
तुम्हारी छात्र छाया में
सभी सानंद हैं स्वामी।
उठो अब खोल नेत्रन को,
विनय भक्तों की सुन लीजिए,
पुन: अवतार ले करके,
सभी को पार कर दीजिए।
हमारे गृह मंदिर पर
कृपा दृष्टि करो भगवन।
सुखी संपन्न हो करके,
सभी दीर्घायु हो भगवन।
विनय विद्या से पुरित हों,
यही वर मांगते स्वामी।
हृदय में ज्ञान करूना का
करो संचार हे स्वामी।
भंवर में खा रही चक्कर
प्रभो मेरे घर की नैया
कृपा करके इसे भगवन
किनारे से लगा देना।
शरण में आ पड़े स्वामी
लगा दे पार हे कार्तिक।।